शीत ऋतु में आयुर्वेदानुसार आहार विहार ” विषय पर मार्गदर्शन

सनातन संस्था द्वारा समय समय पर विभिन्न समाजोपयोगी कार्य किए जाते हैं जैसे नैतिक मूल्यों पर विद्यार्थियों के लिए प्रवचन, सर्वसामान्य लोगों के लिए प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण  शिविर, सामाजिक समस्याओं के विरुद्ध संघर्ष, व्यवसायिक प्रशिक्षण शिविर, वृक्षारोपण, पर्यावरण यात्रा (जुलूस)में सहभाग, दीन लोगों को अन्नदान, दीन लोगों को कपडों का वितरण, गरीबों के लिए निःशुल्क रक्त की जांच, गरीबों के लिए निःशुल्क दंतचिकित्सा तथा  गरीबों के लिए निःशुल्क नेत्रचिकित्सा इत्यादि इसी क्रम में संस्था द्वारा 31 दिसंबर को  “शीत ऋतु में आयुर्वेदानुसार आहार विहार ” विषय मार्गदर्शन किया गया।

मथुरा के श्री जी शिवाशा एस्टेट में कार्यक्रम का प्रारम्भ कुमारी पूनम किंगर जी ने संस्था व संस्थापक के बारे में जानकारी देकर की इसमें संस्था के धर्मशिक्षा और धर्मकार्य के बारे में अवगत कराया।

इसके उपरांत संस्था द्वारा आयोजित विशेष उपक्रम के अंतर्गत “शीत ऋतु में आयुर्वेदानुसार आहार विहार ” विषय पर आयुर्वेदाचार्या श्रीमती पूनम शर्मा जी तथा आयुर्वेदाचार्य भूपेश शर्मा जी ने उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया तथा उपस्थित जिज्ञासुओं को जानकारी देते हुए बताया कि शीत ऋतु में किस प्रकार से हमारा खान पान तथा आहार विहार होना चाहिए, उन्होंने आगे बताया कि शीतकाल में वायु रोगों से बचने के लिए अभ्यंग स्नान करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ज्यादा रूखे आहार ग्रहण नहीं करने चाहिए। स्निग्ध आहार कर सेवन करना चाहिए, ज्यादा ठन्डे पदार्थ ग्रहण नहीं करने चाहिए, घी का सेवन अग्नि के अनुसार करना चाहिए, पित्त के विकार वाले लोगों को गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिए। तथा भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। इस प्रकार विभिन्न प्रकार के निरोगी रहने के सूत्र बताए।
इस कार्यक्रम का लाभ कुल 15 जिज्ञासुओं ने लिया। अंत में जिज्ञासुओं का प्रश्न उत्तर के माध्यम से उत्स्फूर्त प्रतिसाद रहा।

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